उत्तराखंड सहकारी नीति-2026 को कैबिनेट की मंजूरी, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

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देहरादून: उत्तराखंड कैबिनेट ने राज्य सहकारी नीति-2026 को मंजूरी दे दी है। नई नीति का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, स्थानीय उद्यमिता और रोजगार बढ़ाना तथा पलायन को रोकना है। नीति 2026 से 2036 तक तीन चरणों में लागू की जाएगी।

नई सहकारी व्यवस्था सात रणनीतिक स्तंभों पर आधारित होगी, जिसमें सहकारी संस्थाओं को मजबूत करना, महिला और युवा भागीदारी बढ़ाना, नए क्षेत्रों में सहकारिता का विस्तार और आर्थिक विविधीकरण शामिल है।

पैक्स बनेंगे ग्रामीण आर्थिक केंद्र

नीति के तहत पैक्स को केवल ऋण वितरण तक सीमित न रखकर बहुउद्देशीय ग्रामीण आर्थिक केंद्र बनाया जाएगा। कृषि, डेयरी, बागवानी, मत्स्य, भंडारण, कोल्ड-चेन, प्रसंस्करण, बीमा और डिजिटल बैंकिंग जैसी सेवाओं को सहकारी नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।

पर्यटन, ऊर्जा और AI में भी सहकारिता

सहकारिता का विस्तार पर्यटन, होम-स्टे, जैविक खेती, सौर ऊर्जा, औषधीय पौधों, स्वास्थ्य सेवाओं, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हस्तशिल्प और परिवहन जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा। ‘सहकार टैक्सी’ को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

नीति में महिलाओं और युवाओं के लिए सहकारी स्टार्टअप, कौशल विकास, उद्यमिता और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष जोर है। वहीं, डिजिटल बैंकिंग, रियल-टाइम लेखांकन और डिजिटल निगरानी के जरिए सहकारी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाया जाएगा।

सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सहकारी समितियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम, आत्मनिर्भर और सदस्य-केंद्रित संस्थाओं के रूप में विकसित करना है।

हिमालयन लाइव ब्यूरो