मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा शुरू, कुरुड़ से कैलाश रवाना हुईं तीनों डोलियां
चमोली: हिमालय महाकुंभ के रूप में प्रसिद्ध मां नंदा देवी की बड़ी जात यात्रा 2026 शनिवार, 5 सितंबर को सिद्धपीठ कुरुड़ से कैलाश के लिए रवाना हो गई। तीनों डोलियों के प्रस्थान के साथ ही पूरा कुरुड़ क्षेत्र ‘जय मां नंदा’ के जयकारों से गूंज उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए।
कुरुड़ में पांच दिनों तक पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद मां नंदा राजराजेश्वरी की डोलियों को कैलाश के लिए विदा किया गया। यात्रा के दौरान विभिन्न गांवों और पड़ावों पर श्रद्धालु डोली का स्वागत करेंगे।
30 सितंबर को होमकुंड में होगा समापन
करीब 280 किलोमीटर लंबी इस पैदल यात्रा में इस बार डोली वेदनी बुग्याल से आगे बढ़कर होमकुंड पहुंचेगी। यात्रा कार्यक्रम के अनुसार 12 सितंबर को रामणी में विभिन्न देव डोलियों और छंतोलियों का मिलन होगा। 15 सितंबर को वाण स्थित लाटू मंदिर में प्रवास और 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल में सप्तमी की पूजा होगी।
इसके बाद यात्रा रूपकुंड और ज्यूंरागली होते हुए शिलासमुद्र पहुंचेगी। 30 सितंबर को होमकुंड में मुख्य धार्मिक अनुष्ठान के बाद बड़ी जात यात्रा का समापन प्रस्तावित है।
2027 में होगी मुख्य नंदा देवी राजजात
कुरुड़ मंदिर समिति ने इस वर्ष 5 से 25 सितंबर 2026 तक बड़ी जात आयोजित करने का निर्णय लिया है। वहीं, मुख्य नंदा देवी राजजात यात्रा अब 2027 में होगी।
नौटी राजजात समिति और प्रशासन ने मौसम, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी-बारिश के खतरे और आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी नहीं होने के कारण 2026 की राजजात स्थगित की है। यात्रा के आयोजन और पारंपरिक रूट को लेकर कुरुड़ और नौटी पक्ष के बीच मतभेद भी सामने आए थे।
नंदा देवी राजजात को सामान्यतः 12 साल के चक्र से जोड़ा जाता है, हालांकि इतिहास में कई बार यह यात्रा निर्धारित 12 साल के अंतराल पर नहीं हो सकी है।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
