उत्तराखंड में टनल हादसों की लंबी हिस्ट्री, चमोली हादसे ने फिर उठाए सुरक्षा पर सवाल
देहरादून: उत्तराखंड में टनल हादसों का सिलसिला नया नहीं है। 13 अगस्त को चमोली जिले में विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में हुए हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए। हादसे के समय सुरंग में 28 लोग मौजूद थे, जिनमें आठ की मौत हो गई।
सुरंग के ऊपरी हिस्से से भारी पानी और मलबा गिरने से यह हादसा हुआ। 2021 में भी उत्तराखंड में एक बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें 100 से ज्यादा लोग लापता हुए थे। इसके बावजूद टनल निर्माण में सुरक्षा को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं।
हादसे से पहले मिल रहे थे खतरे के संकेत
जिस स्थान पर भूस्खलन हुआ, वहां कुछ समय से मिट्टी, दलदल और पानी निकलने की बात सामने आई थी। सुरंग के ठीक ऊपर मोना नाला समेत तीन से अधिक नाले भी मौजूद हैं। वहीं, टनल निर्माण के बाद से दुर्गापुर गांव में भूस्खलन की समस्या भी बनी हुई है।
भूगर्भीय अध्ययन और सुरक्षा जरूरी
सिलक्यारा टनल हादसे के बाद भी निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सवाल उठे थे। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेषज्ञों के अनुसार टनल परियोजनाओं में भूगर्भीय अध्ययन, निर्माण की निगरानी और श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। विकास के साथ प्रकृति और विज्ञान के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
