धामी कैबिनेट के बड़े फैसले: पहाड़ में निजी विश्वविद्यालय आसान, डॉक्टरों का बढ़ा मानदेय

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देहरादून: धामी कैबिनेट ने पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए दो अहम फैसले लिए हैं। पहाड़ों में निजी विश्वविद्यालय खोलने के लिए भूमि संबंधी मानकों में बदलाव किया गया है, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात डॉक्टरों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है।

पहाड़ में निजी विश्वविद्यालय खोलना आसान

नई व्यवस्था के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालय के लिए 2,500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र जरूरी होगा, जबकि मैदानी क्षेत्रों में यह सीमा 20,000 वर्गमीटर रहेगी। पहले पर्वतीय क्षेत्रों में 2.5 एकड़ भूमि का प्रावधान था। अब भूमि के बजाय निर्मित क्षेत्र को आधार बनाने से पहाड़ में विश्वविद्यालय खोलना आसान होगा। प्रस्तावों की गुणवत्ता के लिए मूल्यांकन मानक भी तय किए जाएंगे।

पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों का बढ़ा मानदेय

सीनियर रेजीडेंट का मानदेय पहाड़ में 90 हजार से बढ़ाकर 1.10 लाख रुपये और मैदान में 84 हजार से 1.05 लाख रुपये किया गया है। जूनियर रेजीडेंट और डिमॉन्स्ट्रेटर का मानदेय पहाड़ में 76 हजार से 85 हजार और मैदान में 71 हजार से 80 हजार रुपये मासिक किया गया है।

सरकार का कहना है कि इन फैसलों से पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

हिमालयन लाइव ब्यूरो 

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