मसूरी में 12 साल बाद लौटा शरदोत्सव, लोककला और संस्कृति के दिखे रंग
मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में 12 साल बाद शरदोत्सव की रौनक लौट आई। मंगलवार को सर्वे मैदान से मालरोड होते हुए गांधी चौक तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। बारिश के बावजूद कलाकारों और स्थानीय लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने लोकनृत्य, संगीत और पारंपरिक वेशभूषा के जरिए देश की सांस्कृतिक विविधता की झलक दिखाई।
शोभायात्रा में महात्मा गांधी और उत्तराखंड के जननायक इंद्रमणि बडोनी पर आधारित झांकियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दौरा रद्द हो गया। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने उत्सव का शुभारंभ किया।
बसंती बिष्ट और पांडवाज ने जमाया रंग
शरदोत्सव की पहली सांस्कृतिक शाम में पद्मश्री लोकगायिका बसंती बिष्ट ने जागरों की प्रस्तुति से उत्तराखंड की लोकपरंपरा को जीवंत किया। इसके बाद पांडवाज बैंड ने लोकधुनों को आधुनिक संगीत के साथ पेश कर दर्शकों का मनोरंजन किया।
नगर पालिका के अनुसार इस बार करीब 80 प्रतिशत अवसर स्थानीय कलाकारों को दिए गए हैं। पांच दिवसीय शरदोत्सव में लोककला, संस्कृति, संगीत और मनोरंजन से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित होंगे।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
