बदरीनाथ में ग्लेशियर टूटने का खतरा, 398 भवनों पर मंडराया संकट

Hanging-Glacier

देहरादून: बदरीनाथ धाम की पहाड़ियों पर लटकते ग्लेशियरों से बर्फ टूटकर गिरने पर बड़ा हिमस्खलन हो सकता है। इससे क्षेत्र के 398 भवन, 2.66 किलोमीटर सड़क, दो पुल, हेलीपैड और पार्किंग प्रभावित हो सकते हैं। इसके अलावा 3.87 हेक्टेयर कृषि भूमि और 15.57 हेक्टेयर वन क्षेत्र भी खतरे की जद में हैं।

भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), DRDO और ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अध्ययन में यह आशंका जताई गई है। 28 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका *लैंडस्लाइड्स* में प्रकाशित अध्ययन में 4,700 से 5,465 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तीन ग्लेशियरों का विश्लेषण किया गया।

अध्ययन के अनुसार, साइट-2 का अनाम ग्लेशियर सबसे अधिक जोखिम वाला है। इसमें बर्फ का अनुमानित आयतन 53.2 से 58.9 लाख घन मीटर है। बर्फ टूटने की स्थिति में हिमस्खलन की गति 78.5 मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच सकती है।

वैज्ञानिकों ने संवेदनशील क्षेत्रों में खतरा मानचित्र तैयार करने, नए निर्माण नियंत्रित करने, सुरक्षित क्षेत्रों की पहचान और पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की है। अध्ययन ने बदरीनाथ क्षेत्र में वैज्ञानिक निगरानी और सुरक्षित निर्माण नियोजन की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

हिमालयन लाइव ब्यूरो 

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