उत्तराखंड में 26 साल बाद भी पलायन जारी, 1,806 गांव हुए वीरान; पौड़ी सबसे ज्यादा प्रभावित
देहरादून: उत्तराखंड में राज्य गठन के 26 साल बाद भी पहाड़ों से पलायन की समस्या गंभीर बनी हुई है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते लोग अपने पुश्तैनी गांव छोड़कर शहरों में बस रहे हैं। ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 1,806 गांव पूरी तरह निर्जन हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 520 गांव पौड़ी गढ़वाल जिले के है।
आयोग की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 50 प्रतिशत पलायन रोजगार की कमी और 15.2 प्रतिशत शिक्षा सुविधाओं के अभाव में हुआ। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं की कमी भी पलायन की बड़ी वजह है।
आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं के अध्ययन ‘From Pahad to Maidan’ में खेती से घटती आमदनी, सिंचाई की कमी, जंगली जानवरों से फसलों को नुकसान और जलवायु परिवर्तन को भी पलायन के प्रमुख कारण बताया गया है। अध्ययन 20 अप्रैल 2026 को Frontiers in Human Dynamics में प्रकाशित हुआ।
सीमांत गांवों से पलायन भी चिंता का विषय है। इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत बुनियादी सुविधाओं और पर्यटन को बढ़ावा दे रही है।
शोधकर्ताओं ने पहाड़ों में स्थानीय रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई और परिवहन सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया है। उनका मानना है कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं लागू करने से ही पलायन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
