प्रेमपूर्ण संबंधों में केवल किशोर ही क्यों दोषी? - उत्तराखंड हाई कोर्ट
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नाबालिक लड़कियों के साथ रोमांटिक और कामुक गतिविधियों में शामिल किशोर लड़कों की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर निर्देश देते हुए राज्य और केन्द्र सरकार से पूछा है कि ऐसे मामलों में शामिल केवल लड़कों को ही क्यों गिरफ़्तार किया जा रहा है जबकि लड़कियों को छोड़ दिया जाता है।
याचिका में कहा गया है कि नाबालिक लड़के और लड़कियों के बीच रोमांटिक संबंधों से जुड़े मामलों में, लड़के को हमेशा दोषी माना जाता है। जनहित याचिका में कहा गया है कि लड़की के बड़े होने पर भी लड़के को हिरासत में ले लिया जाता है और अपराधी माना जाता है, अंततः उसे जेल में डाल दिया जाता है, जबकि उसे पकड़ने के बजाय काउंसलिंग प्रदान की जानी चाहिए।
सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि 20 नाबालिक लड़के फिलहाल इसी तरह के आरोप में हिरासत में बंद हैं। यह जनहित याचिका किसी विशिष्ट मामले से संबंधित नहीं है, बल्कि कानून के व्यापक दुरुपयोग को ध्यान में रखते हुए दायर की गई है, जहाँ लड़कियों को हमेशा पीड़ित माना जाता है, जबकि लड़कों को हर उस मामले में दोषी माना जाता है, जहाँ वे एक-दूसरे से रोमांटिक रिश्ते में होते हैं।
अदालत से उस परिस्थिति पर भी विचार करने का आग्रह किया गया है जहाँ 16 से 18 वर्ष की आयु के दो किशोर, एक लड़की और एक लड़का, रोमांटिक रूप से शामिल हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि ऐसे मामलों में, जब लड़की के माता-पिता द्वारा शिकायत दर्ज की जाती है, तो लड़के को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि पॉक्सो अधिनियम की धारा 3, 4, 5, 6 और 7 के तहत प्रावधान लागू नहीं होते हैं।
अदालत ने मामले को स्वीकार किया और टिप्पणी की कि राज्य इस बात पर विचार कर सकता है कि क्या सीआरपीसी की धारा 161 के तहत लड़के का बयान दर्ज करना उसकी गिरफ्तारी की आवश्यकता के बिना पर्याप्त होगा। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ज्यादा से ज्यादा ऐसे मामलों में किशोर को उसे बुलाकर ऐसी चीजों में शामिल न होने की सलाह दी जा सकती है, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
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