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उत्तराखंड में दो महीने में पांच हेली हादसे: क्या सुरक्षित हैं हेली सेवाएं?

देहरादून: उत्तराखंड में हेली सेवाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। केदारनाथ के पास एक और हेलीकॉप्टर हादसे में पायलट समेत सात लोगों की मौत हो गई है। यह घटना बीते दो महीनों में हुई पांचवीं दुर्घटना है, जिसने हेली सेवाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में सभी हेली सेवाएं दो दिनों के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन दुर्घटनाओं के पीछे तीन मुख्य कारण उभर कर सामने आए हैं:

1. खराब मौसम

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय क्षेत्र में मौसम बेहद तेजी से बदलता है। खराब दृश्यता, तेज हवा और अचानक आने वाले बादलों के कारण हेलीकॉप्टर संचालन जोखिम भरा हो जाता है। 31 अगस्त 2024 की एक घटना में भी भारतीय वायु सेना का MI-17 हेलीकॉप्टर इसी कारण संतुलन खो बैठा था।

2. तकनीकी खामियाँ

हेलीकॉप्टरों में तकनीकी खामियाँ और समय पर मरम्मत न होना एक और बड़ी वजह है। 31 अगस्त की दुर्घटना में शामिल हेलीकॉप्टर पहले भी 24 मई 2024 को तकनीकी खराबी के कारण आपातकालीन लैंडिंग कर चुका था।

3. सुरक्षा प्रोटोकॉल में ढिलाई

हेली सेवाओं के संचालन में प्रतिस्पर्धा इतनी बढ़ गई है कि कई बार कंपनियाँ सुरक्षा की बजाय मुनाफा प्राथमिकता बना लेती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों से पहले आवश्यक सुरक्षा जाँच और प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन न करना दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहा है।


बीते दो महीनों में हुई प्रमुख घटनाएं:

7 जून 2025: केदारनाथ जा रहा हेलीकॉप्टर टेक-ऑफ के समय तकनीकी खराबी के चलते हाईवे पर इमरजेंसी लैंडिंग करने को मजबूर हुआ। टेल रोटर एक कार से टकराया। सभी तीर्थयात्री सुरक्षित रहे, पायलट को मामूली चोटें आईं।

17 मई 2025: एम्स ऋषिकेश की एक हेली एम्बुलेंस रुद्रप्रयाग में क्रैश हो गई। हेलीकॉप्टर का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। डॉक्टर, पायलट और मेडिकल स्टाफ सुरक्षित बच गए।

12 मई 2025: खराब मौसम के चलते बद्रीनाथ से लौट रहा एक हेलीकॉप्टर उखीमठ में स्कूल के मैदान में आपात लैंडिंग करने को मजबूर हुआ। सभी यात्री सुरक्षित रहे।

8 मई 2025: गंगोत्री जा रहा एक हेलीकॉप्टर उत्तरकाशी जिले में खाई में गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में छह लोगों की मौत हुई और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ।


राज्य सरकार ने कहा है कि दो दिनों तक हेली सेवाएं बंद रहेंगी और इस दौरान सभी ऑपरेटरों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। साथ ही, केंद्र सरकार से भी विस्तृत तकनीकी ऑडिट कराने की मांग की गई है।

अब सवाल यही है कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच, क्या उत्तराखंड की हेली सेवाएं सुरक्षित हैं?

हिमालयन लाइव ब्यूरो

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