पूर्व सीएम हरीश रावत ने बर्खास्त कर्मचारियों के लिए उठाई न्याय की मांग
उत्तराखंड विधानसभा से बर्खास्त किए गए कर्मचारियों के समर्थन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने बर्खास्तगी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे असंगत और पक्षपातपूर्ण करार दिया है। हरीश रावत ने कहा कि यदि 2014 के बाद नियुक्त कर्मचारियों की नियुक्ति को अवैध करार दिया गया है, तो 2014 से पहले की नियुक्तियों को वैध कैसे माना जा सकता है?
उन्होंने तर्क दिया कि विधानसभा में सभी कर्मचारी एक ही प्रक्रिया से नियुक्त हुए हैं। ऐसे में बर्खास्त कर्मचारियों को बहाल किया जाए, अन्यथा 2014 से पहले नियुक्त सभी कर्मचारियों को भी बर्खास्त किया जाए।
पूर्व सीएम ने कहा कि राज्य गठन से लेकर 2022 तक नियुक्तियों की प्रक्रिया एक जैसी रही है। यदि इसमें कोई त्रुटि थी तो उसकी जिम्मेदारी विधानसभा और सरकार की है। पांच साल से अधिक सेवा दे चुके कर्मचारियों को अचानक बर्खास्त कर देना अन्यायपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि बर्खास्त कर्मचारी अपनी बहाली के लिए अदालत का सहारा ले रहे हैं, लेकिन यह सरकार और विधानसभा का दायित्व है कि उन्हें न्याय दिलाया जाए। यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि नैतिक और प्रशासनिक विवेक का है।
हरीश रावत ने सुझाव दिया कि मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष को इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्व विधानसभा अध्यक्षों से परामर्श लेकर निष्पक्ष समाधान पर पहुंचा जा सकता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि "यदि नियुक्तियों में त्रुटियां रही हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पूरी प्रक्रिया को गलत ठहराना और केवल कुछ कर्मचारियों को दंडित करना अनुचित है।"
रावत ने कहा कि बर्खास्त कर्मचारियों को न्याय दिलाने के लिए सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से इस मामले में संवेदनशीलता के साथ न्याय करने की अपील की है।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
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