उत्तराखंड में जल संकट गहराया, गर्मी में बढ़ेगी मुश्किल
उत्तराखंड में पानी की किल्लत ने अभी से चिंता बढ़ा दी है। मार्च के महीने में ही जल स्रोतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे जल संस्थान के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई इलाकों में हर रोज पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कई स्थानों पर पानी दो से तीन दिन के अंतराल में दिया जा रहा है, जबकि कुछ इलाकों में चार दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।
लोहाघाट नगर में जल संकट सबसे अधिक गहराया हुआ है। यहां के विभिन्न वार्डों में तीसरे और चौथे दिन पानी मिल रहा है। हालात को देखते हुए जल संस्थान ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों के जरिए पानी पहुंचाने की योजना बनाई है। विभागीय वाहनों और पिकअप ट्रकों से पानी बांटने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि जरूरतमंद लोगों तक पानी पहुंच सके।
जल संस्थान के ईई बिलाल यूनुस के अनुसार, जिले के कई जल स्रोतों में पानी का स्तर 30 से 40 प्रतिशत तक गिर चुका है। अगर पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो जल संकट और बढ़ सकता है। हालांकि, अभी सभी पेयजल योजनाओं से पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन कहीं नियमित तो कहीं दो से तीन दिन में पानी दिया जा रहा है।
चंपावत नगर के लिए बनी क्वैराला पंपिंग योजना के स्रोत में भी पानी की कमी देखने को मिल रही है। लोहाघाट में चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना, बनस्वाड़ योजना, ऋषेश्वर ट्यूबवेल और फोर्ती गधेरा से पानी की आपूर्ति हो रही है, लेकिन यह मांग से काफी कम है।
लोहाघाट के सहायक अभियंता पवन बिष्ट के अनुसार, नगर में प्रतिदिन 2160 केएल पानी की जरूरत होती है, लेकिन फिलहाल केवल 475 केएल पानी ही उपलब्ध हो पा रहा है। चार महीने पहले तक जल स्रोतों से 200 से 250 केएल पानी मिल रहा था, जो अब घटकर 30-40 केएल तक आ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले सात-आठ महीनों से जल स्रोतों को रिचार्ज करने लायक बारिश नहीं हुई है, जिससे जल स्तर लगातार गिर रहा है। यदि गर्मी के दौरान भी वर्षा नहीं हुई, तो जल संकट और गहरा सकता है और पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करें और बर्बादी से बचें।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
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