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Uttarakhand

उत्तराखण्ड के बुजुर्ग दरख़्तों को दी जाएगी पेंशन

उत्तराखंड में उम्रदराज पेड़ों की जिंदगी बचाने के लिए नई योजना पर विचार किया जा रहा है। वन महकमें में चल रही क़वायद ये बताती है कि बुजुर्ग पेड़ों को पेंशन देने की आवश्यकताओं को जांचा जा रहा है और महकमे के विशेषज्ञ इस पर अपनी राय भी बना रहे हैं। हालांकि फिलहाल पेड़ों को पेंशन देने से जुड़ी इस फाइल पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

इंसानों के लिए चल रही वृद्धा पेंशन की तर्ज पर बुजुर्ग पेड़ों को भी पेंशन देने की जरूरत का आकलन किया जा रहा है। उत्तराखंड वन विभाग में आए एक सुझाव के बाद विभाग के अधिकारी फिलहाल इस दिशा में विशेषज्ञों की राय जानने में जुटे हुए हैं। विभाग के भीतर अनुसंधान विंग से इस मामले में राय भी ली जा रही है। बड़ी बात यह है कि वन विभाग को सुझाव देने वाले पत्र में हरियाणा सरकार का जिक्र करते हुए उत्तराखंड में भी हरियाणा की तर्ज पर ही पेड़ों को पेंशन देने की बात कही गई है। जाहिर है कि वन विभाग को सुझाव मिलने के बाद इसका परीक्षण किया जाना बेहद जरूरी है। इसलिए विभाग ने योजना की जरूरत को लेकर अनुसंधान विंग से राय मांगी है।

मामले में हरियाणा सरकार का जिक्र किया गया है ऐसे में वन मुख्यालय के स्तर पर अधिकारियों को निर्देशित करते हुए हरियाणा में भी ऐसी किसी योजना के चलने को लेकर पुष्टि करने के लिए कहा गया है। वन विभाग इस सुझाव के बाद यह जानना चाह रहा है कि क्या उत्तराखंड में इस तरह की किसी योजना की जरूरत है या नहीं और इसलिए हल्द्वानी स्थित वन अनुसंधान, प्रशिक्षण एवं प्रबंधन को इसके लिए विभिन्न पहलुओं पर अपनी राय देने के लिए कहा गया है।

हरियाणा में सरकार ने प्राण वायु देवता पेंशन स्कीम के तहत 75 साल या इससे ज्यादा उम्र के पेड़ों को पेंशन देने का फैसला किया था। हरियाणा में ऐसे 3810 पेड़ चिन्हित किए गए थे, जिन्हें इस योजना के तहत पेंशन दी जा रही है। हरियाणा में साल 2023 में इस योजना को शुरू किया गया था। योजना के तहत हरियाणा सरकार इन पेड़ों के रखरखाव के लिए 2500 रुपए देती है, हरियाणा सरकार ने फिलहाल इस योजना को 5 साल के लिए तैयार किया है। ऐसे पेड़ों के चिन्हीकरण को लेकर भी विशेष प्रक्रिया अपनानी होती है, इसमें वन विभाग के कार्यालय में पेंशन के लिए आवेदन करना होता है। वन विभाग की कमेटी इस आवेदन का आकलन करती है इसके बाद पेड़ का सत्यापन होने के बाद ही पेंशन शुरू की जाती है।

उत्तराखंड और हरियाणा में वन क्षेत्र को लेकर जमीन आसमान का अंतर है। उत्तराखंड में कुल भौगोलिक क्षेत्र का 70 प्रतिशत वन क्षेत्र है। केवल वन विभाग के अंतर्गत आने वाले वन क्षेत्र का आकलन करें तो उत्तराखंड में कुल 38000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में वन है, इसमें वन पंचायत के अंतर्गत आने वाले जंगल और सिविल सोयम के वन शामिल नहीं हैं। उधर हरियाणा में देखे तो यहां केवल 1559 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जंगल हैं। इस तरह हरियाणा के कुल भौगोलिक क्षेत्र में केवल 3. 53 प्रतिशत ही वन है।

हिमालयन लाइव ब्यूरो

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