केदारनाथ यात्रा में रिकॉर्ड कारोबार: एक महीने में 200 करोड़ की आर्थिक गतिविधि
रुद्रप्रयाग: श्री केदारनाथ धाम यात्रा इस वर्ष एक बार फिर न केवल श्रद्धा का केंद्र बनी है, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी उत्तराखंड के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। 2 मई 2025 को कपाट खुलने के बाद से एक महीने के भीतर ही यात्रा से 200 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार हुआ है। यह न केवल तीर्थाटन का महत्व दर्शाता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए यह यात्रा रोजगार और आय का मजबूत माध्यम बनती जा रही है।
श्रद्धालुओं की संख्या ने पार किया 7 लाख का आंकड़ा
एक महीने में ही 7 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे हैं। औसतन प्रतिदिन 24,000 से ज्यादा भक्त केदारपुरी पहुंच रहे हैं। यह संख्या जून माह में और बढ़ने की संभावना है।
विभिन्न क्षेत्रों में हुआ जबरदस्त आर्थिक लाभ
1. घोड़ा-खच्चर सेवा: 40.5 करोड़ की आय
करीब 1.39 लाख तीर्थयात्रियों ने 20 किमी लंबे कठिन पैदल मार्ग को पार करने के लिए घोड़ा-खच्चरों का सहारा लिया। इससे 40 करोड़ 50 लाख रुपए की कमाई हुई। हालांकि कुछ दिनों के लिए इक्वाइन इन्फ्लूएंजा वायरस के कारण संचालन प्रभावित रहा।
2. हेली सेवा: 35 करोड़ रुपए का कारोबार
पैदल चलने में असमर्थ श्रद्धालुओं के लिए हेली सेवा जीवन रेखा साबित हुई। अब तक 33,000 श्रद्धालु हेली के माध्यम से धाम पहुंचे, जिससे 35 करोड़ रुपए की आय हुई। प्रशासन ने यात्रियों को IRCTC की वेबसाइट से ही बुकिंग करने की सलाह दी है।
3. डंडी-कंडी सेवा: 1.16 करोड़ की कमाई
7000 से अधिक पंजीकृत डंडी-कंडी चालकों ने अब तक 29,275 श्रद्धालुओं को सेवा दी, जिससे 1.16 करोड़ रुपए की आमदनी हुई। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह सेवा बहुत सुविधाजनक मानी जाती है।
4. शटल टैक्सी सेवा: 7 करोड़ रुपए का राजस्व
225 टैक्सियों के माध्यम से श्रद्धालु सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक पहुंचते हैं। 7 लाख यात्रियों से यह सेवा अब तक 7 करोड़ रुपए कमा चुकी है। इस वर्ष 25 गाड़ियां महिलाओं और बुजुर्गों के लिए आरक्षित की गई हैं।
5. होटल, टेंट और रेस्तरां व्यवसाय: 100 करोड़ से अधिक का कारोबार
गौरीकुंड से लेकर केदारपुरी तक सैकड़ों होटल, टेंट और भोजनालयों में ठहरने-खाने की व्यवस्था की गई है। व्यापार संघ के अनुसार, अब तक का कुल अनुमानित कारोबार 100 करोड़ रुपए से अधिक का है।
सरकारी GMVN के 15 प्रतिष्ठानों (जिसमें ध्यान गुफा भी शामिल है) ने 3.8 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया है।
प्रशासन की पहल और सरकार का उद्देश्य
उत्तराखंड सरकार के अनुसार, केदारनाथ यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास का एक सशक्त मॉडल बन चुकी है।
"हमारा उद्देश्य केवल श्रद्धालुओं को सुविधा देना नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं, महिलाओं और छोटे व्यापारियों को भी आर्थिक रूप से सशक्त करना है," प्रशासन ने कहा।
सुरक्षा, स्वच्छता और सुगमता पर विशेष ध्यान देते हुए यात्रा को समृद्ध बनाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
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