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हरिद्वार में कांवड़ यात्रा पर नभ नेत्र की नजर, ड्रोन से होगी 24x7 निगरानी

हरिद्वार: आगामी कांवड़ यात्रा को लेकर उत्तराखंड प्रशासन ने सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से कड़े इंतजाम शुरू कर दिए हैं। इस वर्ष यात्रा की निगरानी के लिए अत्याधुनिक "नभ नेत्र" ड्रोन की तैनाती की जाएगी। यह ड्रोन हरिद्वार के भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों, सड़कों, घाटों और पुलों पर निगरानी रखेगा, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आपदा की तुरंत सूचना मिल सकेगी।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) के अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनंद स्वरूप ने शनिवार को यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि आइआरएस (इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम) की अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिससे संभावित आपदाओं से निपटने में मदद मिलेगी।

ड्रोन से लाइव निगरानी:
ड्रोन के विजुअल्स राज्य व जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों से लगातार मॉनिटर किए जाएंगे, जिससे किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी।

सचेत एप और हेल्पलाइन:
कांवड़ियों के मोबाइल में `सचेत एप` डाउनलोड कराया जाएगा, जिससे उन्हें मौसम और आपदा संबंधी अलर्ट मिलते रहेंगे। साथ ही टोल फ्री नंबर 112, 1070 और 1077 पर आपात स्थिति में सहायता ली जा सकेगी।

घाटों पर तैनात रहेंगे एसडीआरएफ-एनडीआरएफ:
गंगा घाटों पर सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, जल पुलिस और 60 आपदा मित्रों की तैनाती की जाएगी। हरिद्वार में एनडीआरएफ की एक टीम पहले से मौजूद रहेगी और जरूरत पड़ने पर देहरादून से अतिरिक्त टीमें भेजी जाएंगी।

वन्य जीवों से सुरक्षा के भी होंगे पुख्ता इंतजाम:
कांवड़ यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले वन क्षेत्रों में वन विभाग की टीम सतर्क रहेगी। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे।

विभागीय समन्वय और योजना:
अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे यात्रा से संबंधित योजना को आपदा प्रबंधन की दृष्टि से तैयार करें और प्रत्येक विभाग एक जिम्मेदार अधिकारी को सिंगल प्वाइंट ऑफ कॉन्टेक्ट के रूप में नामित करें।

उत्तराखंड में यह यात्रा 11 जुलाई से शुरू हो रही है। भारी भीड़ और धार्मिक उत्साह के बीच प्रशासन यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।

हिमालयन लाइव ब्यूरो

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