उत्तराखंड में कृषि क्रांति: मिलेट्स और फलों की खेती को बढ़ावा
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि और उद्यानिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में कई नीतिगत और संस्थागत पहल की हैं। कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने सचिवालय मीडिया सेंटर में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि राज्य में बारहमासी मिलेट्स और आधुनिक फलों के उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए योजनाओं का व्यापक खाका तैयार किया गया है, जिससे ना केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि पलायन पर भी अंकुश लगेगा।
उत्तराखंड स्टेट मिलेट्स पॉलिसी 2025-26
राज्य सरकार ने "उत्तराखंड स्टेट मिलेट्स पॉलिसी 2025-26" लागू की है, जो दो चरणों में क्रियान्वित की जाएगी।
प्रथम चरण (2025-26 से 2027-28): 24 विकासखंडों में 30,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कार्य।
द्वितीय चरण (2028-29 से 2030-31): 44 विकासखंडों में 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में विस्तार।
नीति के तहत मंडुवा, झंगोरा, रामदाना, कौणी और चीना जैसी पारंपरिक फसलों को आधुनिक तकनीकों के साथ उगाने पर जोर रहेगा। कुल ₹134.89 करोड़ की योजना के अंतर्गत किसानों को बीज और जैविक उर्वरक पर 80% सब्सिडी, पंक्ति बुवाई पर ₹4000/हेक्टेयर और सीधी बुवाई पर ₹2000/हेक्टेयर प्रोत्साहन राशि मिलेगी। साथ ही, मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट्स और न्यूट्री हब भी स्थापित किए जाएंगे। योजना से 3 लाख से अधिक किसानों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है।
उत्तराखंड कीवी नीति
2025-26 से 2030-31 तक लागू होने वाली कीवी नीति में पर्वतीय क्षेत्रों में कीवी बागवानी को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
कुल लागत: ₹12 लाख प्रति एकड़, जिसमें 70% राजसहायता दी जाएगी।
11 जनपदों में लागू नीति (हरिद्वार और उधमसिंहनगर को छोड़कर)।
₹894 करोड़ की योजना से 3500 हेक्टेयर भूमि पर कीवी उत्पादन का लक्ष्य, जिससे 17,500 किसान लाभान्वित होंगे।
ड्रैगन फ्रूट खेती योजना
ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए 2025-26 से 2027-28 तक तीन वर्षीय योजना बनाई गई है।
योजना के अंतर्गत 7 जनपदों में लागू।
₹8 लाख प्रति एकड़ लागत पर 80% सब्सिडी।
228 एकड़ क्षेत्र में खेती का लक्ष्य, जिससे लगभग 450 किसान लाभान्वित होंगे।
मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (CMFME)
पर्वतीय क्षेत्रों में स्थापित खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम योजना (PMFME) के अतिरिक्त मुख्यमंत्री योजना के तहत अधिकतम ₹5 लाख का टॉप-अप मिलेगा।
यह सुविधा अब सार्टिंग/ग्रेडिंग इकाइयों को भी मिलेगी।
कुल 780 इकाइयों को इस योजना का लाभ मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार को बल मिलेगा।
सेब तुड़ाई उपरांत प्रबंधन योजना
राज्य में सेब की गुणवत्ता और विपणन को बेहतर बनाने हेतु 2024-25 से 2031-32 तक ₹129.97 करोड़ की योजना लागू की गई है।
22 सीए स्टोरेज और 180 सार्टिंग-ग्रेडिंग इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य।
व्यक्तिगत और एफपीओ स्तर पर 50% से 70% तक राजसहायता का प्रावधान।
5000 हेक्टेयर में उच्च उत्पादकता वाली सेब बागवानी का लक्ष्य (25 मैट्रिक टन/हेक्टेयर)।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि ये योजनाएं पर्वतीय अंचलों में किसानों को आत्मनिर्भर बनाएंगी और युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खोलेंगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
हिमालयन लाइव ब्यूरो
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